दरिंदों के हाथों पिसी नन्ही परी के लिए करें दुआएं…
अम्बिकापुर :- मैं तुम्हारी नन्ही परी हूं……..
मैं आसिफा हूं , मैं निर्भया हूं……
कब तक करोगे हमारे ऊपर ज्यादती हम को भी जीने दो ……..
मंदसौर की बच्ची , अपने परिवार की नन्ही परी , मौत और जिंदगी की लड़ाई लड़ रही है । उसके शरीर पर जो जखम इंसानी रूपी शैतान ने दिए हैं उन जख्मों को देख कर उसके माता-पिता पर क्या गुजर रही होगी, और नन्ही परी कितनी पीड़ा से गुजर रही होगी । उसके मन में कैसे-कैसे विचार आ रहे होंगे । शायद वह बोलना चाहती होगी अंकल ,भैया चाचा , मैंने आपका क्या बिगाड़ा था , आपने मेरे साथ ऐसा क्यों किया, आपने मेरे शरीर को जगह जगह से काट दिया , जगह जगह पर जखम दिए । आपको मुझ को देख कर अपनी बेटी की याद नहीं आई, उस नन्ही सी परी के मुंह से शायद यह शब्द निकले होंगे दर्द हो रहा है.. मां , यह क्या कर दिया अंकल ने , सांस मेरी उखड़ रही है , मैं फस गई कैसे दलदल में ।।
हम सब लोग मिलकर उस नन्ही परी के लिए दुआएं करें , प्रार्थना करें , हमारी परी जल्दी स्वस्थ होकर वापस अपने घर आ जाए…….
आखिर में मैं अपनी नन्ही परी के लिए यही लिखना चाहूंगा ………..
मिटा सके जो दर्द तेरा
वह शब्द कहां से लाऊं
मिल सके तुझे इंसाफ
वह इंसानियत कहां से लाऊं