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ढोढ़ी का गंदा पानी और सरकारी दावों की खुली पोल…


बिजली चट्टान के पहाड़ी कोरवा परिवार आज भी ढोढ़ी के दूषित पानी पीने को मजबूर…
आजादी के 8 दशक बाद भी स्वच्छ बूंद-बूंद पानी को मोहताज…
योजनाएं कागजों में दौड़ रहीं , फिर ये क्षेत्र अछूता क्यो?…

सीतापुर :-  सरकार की योजनाओं में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के दावे भले ही बड़े-बड़े हों, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। सीतापुर क्षेत्र के बिजली चट्टान में रहने वाले पहाड़ी कोरवा जनजाति के लोग आज भी ढोढ़ी के गंदे पानी के भरोसे अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं।


विडंबना यह है कि सरकारी कागजों में गांव-गांव पानी पहुंचाने की योजनाएं सफलता की कहानी लिख रही हैं, लेकिन बिजली चट्टान के पहाड़ी कोरवा परिवारों की जिंदगी में यह कहानी अब तक नहीं पहुंच सकी है। यहां नलों से पानी की धार बहने के बजाय ग्रामीणों की आंखों से उम्मीदें बह रही हैं और प्यास बुझाने के लिए उन्हें गंदे पानी का सहारा लेना पड़ रहा है।


ढोढ़ी का पानी कितना स्वच्छ है, यह देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है। फिर भी मजबूरी ऐसी कि यही पानी पीने, खाना बनाने और रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल करना पड़ रहा है। सरकारी योजनाओं की चमकदार तस्वीरों के सामने यह दृश्य मानो विकास के दावों को आईना दिखा रहा है।
एक ओर शासन-प्रशासन हर घर जल, शुद्ध पेयजल और जनजातीय क्षेत्रों के विकास के दावे करता है, वहीं दूसरी ओर विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह के लोग आज भी पानी के लिए प्रकृति के भरोसे हैं। सवाल यह है कि आखिर सरकारी योजनाओं की पहुंच इन पहाड़ी बस्तियों तक कब पहुंचेगी?


विडंबना यह है कि आजादी के 80 साल बाद भी लोगों के घरों में पीने के लिए स्वच्छ जल तक नसीब नहीं है ।ऐसे में विकास के दावे महज खोखली तस्वीर नजर आती है। कागजों में विकास की गंगा बह रही है और जमीन पर ग्रामीण गंदे पानी की ढोढ़ी के सहारे जीवन काटने को मजबूर हैं।


यहां के जनजातीय ग्रामीण अजय राम,सोमार साय, बंधनु राम, सनी राम, घुरसाय, नई हारो बाई, अंजना बाई, मनियारी बाई, धनेश्वर राम,संजय राम, कुंवर साय, दिनेश राम, सीताराम, नान साय, सुखमतिया बाई आदि ने प्रशासन से बस्ती में जल्द से जल्द स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग की है। अब देखना यह है कि जिम्मेदारों की नजर इस बस्ती पर कब पड़ती है—या फिर सरकारी दावों की तरह पानी भी सिर्फ कागजों में सिमट कर रह जाती है।

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