गया पिंड दान करने जाते हैं पिंड छुड़ाने नहीं …गया में पिंडदान के बाद भी श्राद्ध करते रहना चाहिए… देवकीनंदन ठाकुर…

अम्बिकापुर : श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस की शुरुआत विश्व शांति की प्रार्थना के साथ की गई। जिसके बाद पूज्य महाराज श्री ने पधारे सभी प्रभू प्रेमियों को – “मेरे प्रियाकांत सरकार रहते घट-घट में”, भजन श्रवण कराया।

कथा के पंचम दिवस पर पूज्य महाराज ने भक्तगणों के सवाल- गया में पिंडदान करने के बाद श्राद्ध करना चाहिए या नहीं? का उत्तर दिया।
महाराज ने भक्तगणों के साथ एकादशी व्रत का महत्व भी सांझा किया- भगवान को पाने का सबसे प्रिय व्रत है एकादशी व्रत। एकादशी का व्रत सभी वैष्णवों को करना चाहिए। जो लोग भगवान को प्रसन्न कर उन्हें पाना चाहते हैं उन्हें एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए।

आगे महाराज ने भाईयों, पतियों एवं पिताओं के लिए भी खास संदेश दिया और कहा- शादी के बाद बहन को, बेटी को और भांजी को हमेशा देते रहना चाहिए क्युंकि आप जितना उनको देते रहेंगें आपका घर उतना ही प्रसन्न व भरा-पूरा रहेगा। महाराज श्री ने उन भक्तों को भी विशेष ज्ञान प्राप्ति कराया जो भगवान के दर्शन चाहते हैं- महाराज ने आगे कहा- आप सब से मेरा आग्रह है जो भगवान से मिलना चाहते हैं आप अपने मन के कपट का त्याग करिए । कभी-कभी सारी चीज़े सही होती हैं लेकिन जाने-अनजाने में कभी-कभी हम लोगों से वैष्णव अपराध होता है। जिसके कारण भगवत कृपा नहीं होती भगवत दर्शन नहीं हो पाते। आज के समय में यह अपराध आसानी से हो जाता है । आपके आस-पास यदि कोई भक्त रहता है यदि आप उनकी बुराई कर दें, फिर आप चाहे जितनी भी सच्ची श्रद्धा करते रहिए लेकिन जब तक वो आपको क्षमा नहीं करेगा तब तक आपको भगवान दर्शन नहीं देंगें।

ऐसे बहुत से घर हैं जहां प्रातः व सांय काल में पूजा पाठ के समय अगर बत्ती जलाई जाती है लेकिन उनके लिए पूज्य श्री ने एक विशेष सूचना दी- घर या मंदिर में अगरबत्ती नहीं जलानी चाहिए क्युंकि अगरबत्ती में बांस होता है और बांस का घर में जलना अशुभ फल देने वाला होता है। घर एवं मंदिरों में धूप-दीपक जलाएं लेकिन अगरबत्ती ना जलाएं।
कथा के पंचम दिवस पर पूज्य महाराज श्री ने भक्तों को श्याम सुंदर की ब्रज की लीलाओं की कथा (दशम स्कंध) श्रवण कराई, एवं पंचम दिवस के उपरांत श्री गिरिराज महाराज के दर्शन कर आशिर्वाद प्राप्त किया। और कथा पंडाल के भक्त झूमते रहे।



