हमारे काम ना तो बॉलीवुड आएगा ना हॉलीवुड, आएगा तो हमारे संस्कार एवं हमारे कन्हैया … दुख को किसी व्यक्ति के सामने मत बताओ, बताओ तो केवल गुरु एवं कन्हैया को … देवकीनंदन ठाकुर …

अम्बिकापुर : श्रीमद् भागवत कथा के षष्ठम दिवस की शुरुआत विश्व शांति की प्रार्थना के साथ की गई। जिसके बाद पूज्य महाराज श्री ने पधारे सभी प्रभू प्रेमियों को – “मीठे रस से भरो री राधा रानी लागे महारानी लागे” भजन श्रवण कराया।

महाराज श्री ने आज सर्वप्रथम भगवान के प्रति भक्तों का विशेष मार्गदर्शन किया और कहा- भगवान कहते हैं जो मनुष्य मुझे जिस भाव से भजता है मैं उसकी उस ही भाव से रक्षा करता हूं और उसको मैं भी भजता हूं। भगवान किसी के साथ भेद नहीं करते, भगवान का नाम ही समदर्शी है। जैसा आपका भाव है भगवान उस ही रूप में आपको अनुभव होते हैं।

कथा के मध्य पूज्य महाराज ने भक्तों से पूछा कौन-कौन भगवान की पूजा करता है, पंडाल में बैठे सभी भक्तों ने अपने हाथ खड़े कर लिए। जब मनुष्य अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना करता है परेशान होता है, तो अपने दुख कुछ उन लोगों के सामने व्यक्त करता है जो उस व्यक्ति के पीठ-पीछे उसकी हंसी उड़ाते हैं। महाराज ने कहा कि अपना दुख कभी भी किसी व्यक्ति को नहीं कहना चाहिए उसके लिए केवल दो ही उचित स्थान है एक अपना गुरु और एक कन्हैया। यदि मनुष्य उन दो स्थान पर अपना दुख बताया प्रकट करें तो उसकी कभी भी हंसी नहीं उड़ेगी और समाधान भी हो जाएगा।

प्रसंग के मध्य पूज्य महाराज श्री ने कहा- हर संतान की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि वो अपने मां-बाप व अपने पितरों के लिए शुभ कार्य करे जिससे उनको सुख एवं शांति मिल सके।

पूज्य महाराज श्री ने युवाओं के उज्जवल भविष्य हेतु मार्गदर्शन करने का प्रयास किया और कहा- बॉलीवुड वाले लोग जिसे रास कहते हैं वो रास नहीं है। सावधानी से समझिएगा, युवाओं से मेरा निवेदन है जीवन में कभी भी बॉलीवुड को फॉलो मत करो । हमारे काम ना तो बॉलीवुड आएगा ना हॉलीवुड आएगा, हमारे काम हमारे संस्कार एवं कन्यैया ही आऐंगे।

कथा के षष्ठम दिवस पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में सभी भक्तगण श्री कृष्ण व रुकमणि जी के विवाह समारोह में शामिल हो बधाइयों का आनंद लिया।



