अंबिकापुरछत्तीसगढ़सरगुजा संभाग

इस देश को या तो राम भक्त की जरूरत है या देश भक्तों की, पृथ्वी के बोझों की नहीं… श्री देवकीनंदन ठाकुर …

अंबिकापुर : श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस की शुरुआत विश्व शांति प्रार्थना के साथ की गई। जिसके बाद पूज्य महाराज श्री ने पधारे सभी प्रभू प्रेमियों को – “मेरा तार प्रभू संग जोड़े ऐसा कोई संत मिले” भजन श्रवण कराया।

कथा के तृतीय दिवस की शुरुआत में श्री अजय अग्रवाल (सभापति नगर निगम) पंडाल में पहुंचें एवं आरती में शामिल हुए और उन्होंने पूज्य महराज जी से आशीर्वाद प्राप्त किया।

पूज्य महाराज ने पंडाल में एकत्रित सभी मां-बाप से कहा-चाहे आपका बच्चा ना पढ़ सके इंग्लिश, ना बन सके डॉक्टर, इंजिनियर लेकिन आपका बच्चा सच्चा मानव ज़रुर बनना चाहिए, परमात्मा को प्रिय लगे ऐसा मानव ज़रुर बने। याद रखना कि इस देश को पृथ्वी के बोझों की ज़रुरत नहीं है, इस देश को या तो राम भक्त हो या देश भक्त हो ऐसे बच्चों की परम आवश्यकता है। या तो अपने धर्म पर कुर्बान हो जाए या अपने देश पर कुर्बान हो जाए ऐसी संतान जिसके घर में आती है वो पीढ़ियां तर जाती है, उस मां का कोख धन्य हो जाता है।

ठाकुर जी ने आज विशेष तौर से बच्चों का मार्गदर्शन करने का किया प्रयास…

यह बात तो हम सभी जानते हैं कि आज की पीढ़ी के बालक किस व्यवहार के हैं और उनका भक्ति के अलावा बाकी के कार्यों में मन लगता है। ऐसे ही बच्चों के लिए पूज्य महाराज श्री ने आगे कहा- आज के समय के बच्चे क्या जाप करते हैं? यदि लड़का है तो हिरोइन का जाप कर रहा है और लड़की है तो हिरो का जाप कर रही है। अगर ये दोनों नहीं तो पैसे का जाप चल रहा है। लेकिन ईश्वर का जाप होना चाहिए। मनुष्य को किसका त्याग करना चाहिए, वो यह भी नहीं जानता। छोड़ने योग्य – काम, क्रोध, ईर्ष्या, मोह लेकिन मनुष्य इसे कभी नहीं छोड़ता। जो छोड़ने के योग्य नहीं है वो है भगवान की कथा , जिसे मनुष्य जब मन चाहे आसानी से छोड़ देता है।

पूज्य महाराज श्री ने आगे कहा- कथा हमें जीना सिखाती है और जीना बचपन से ही सीखना चाहिए। क्युंकि पूरी ज़िदंगी जीना है। जब आपको बचपन में पता चल जाए कि आपको कैसे जीना है तो आपकी जवानी खराब नहीं होगी और जिसकी जवानी खराब नहीं होती उसकी जिंदगानी खराब नहीं होती। कथा के आगे के क्रम में ठाकुर जी ने ध्रुव चरित्र एवं स्वर्ग नरक के बारे में विस्तार से बताया कि मनुष्य को कौन से कर्म करने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है और किस बुरे कर्म को करने से कौन सी नरक में यातनाएं भोगनी पड़ती है। और कथा के अंत में बामन अवतार के दर्शन के साथ ही आज की कथा की संध्या आरती की गई।

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