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अंबिकापुर शहर हुआ भक्तिमय, कथा सुनने उमड़ा जनसैलाब… प्रख्यात कथाकार देवकीनंदन ने सुनाई पहले दिन की कथा…

अंबिकापुर :… राष्ट्रीय संत देवकीनंदन ठाकुर ने आज पहले दिन की कथा को होटल ग्रैंड बसंत में अपने ओजपूर्ण वाणी से सुनाते हुए लोगों को आह्लादित कर दिया।

आज श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवम् विश्व शांति प्रार्थना के साथ की गई। जिसके बाद पूज्य महाराज श्री ने पधारे सभी प्रभू प्रेमियों को – “श्री श्याम तुम्हारे चरणों में इक बार ठिकाना मिल जाए” भजन श्रवण कराया।

कथा के प्रथम दिवस पर छत्तीसगढ़ शासन के (खाद्य और संस्कृति विभाग) मंत्री अमरजीत भगत भी पधारे और उन्होनें व्यासपीठ से आशिर्वाद प्राप्त कर कथा श्रवण किया।

अगले माह की 10 तारीख से पितृ पक्ष लगने जा रहा है। जिसके हेतु पूज्य महाराज श्री ने भक्तों से कहा- यह बड़ा उत्तम समय है कि हम अपने पित्रों को मना लें क्युंकि जब हमारे पितृ रूठ जाते हैं, तो हमें किसी भी कार्य में सफलता नहीं मिलती है, घर में आशांति का वास होगा, क्लेश बढ़ जाएगा, भाई-भाई में लड़ाई होगी, पति पत्नी में लड़ाई होगी। पूज्य महाराज श्री ने आगे कहा कि – पितृ रुष्ठ होने पर 2 बड़ी समस्या होती हैं पहली- बच्चों की शादियां नहीं होती या होंगी भी तो लेट होंगी, दूसरी- वंश आगे नहीं बड़ता। यह सभी पहचान है जिससे आप जान सकते हैं कि आप पितृ आपसे रुष्ठ हैं।

पूज्य महाराज श्री ने भक्तगणों के सवाल- कि अपने पितृ को कैसे मनाएं का जवाब दिया और कहा- जिस समय आपके मन में यह संकल्प हुआ कि हम श्रीमद् भागवत कथा सुनने जाएंगे उस ही क्षण आपके पितृ, पितृलोक में नृत्य करने लगे और उनके नृत्य करने का कारण ये है कि हम बहुत भाग्यशाली है कि हमारे वंशज जो भागवत कथा सुनने जाएंगे तो उनके किए सदकर्म से हमारा भी कल्याण हो जाएगा इसलिए हम अपने वंशजों से प्रसन्न हैं।

आगे पूज्य ठाकुर कहते हैं- भागवत का यही फल है कि सब यहां उपस्थित रहें और श्रीमद् भागवत कथा अपने मन-क्रम-वचन से सुनें। आपके मन-क्रम-वचन से कथा सुनने से आपके पित्रों को मुक्ति मिल जाएगी।

कथा के प्रथम दिवस पर सभी भक्तगणों ने भागवत कथा के महत्व का वर्णन श्रवण किया। आज प्रथम दिवस की कथा में ठाकुर जी ने आत्मदेव के पुत्र रूप में धुंधकारी एवं गोकर्ण की भी कथा सुनाई और यह बताया कि कैसे भागवत रूपी कथा धुंधकारी जैसे प्रेत योनि में गए हुए लोगों का भी कल्याण एवं मोक्ष प्रदान करवा देता है। लोगों ने कथा को बहुत ही भक्ति भाव से सुना एवं सराहा। यह कथा लगातार 7 दिनों तक अविरल भाव से सुनने की ठाकुर देवकीनंदन ने लोगों से अपील भी की और कहा कि अगर यह कथा नियमानुसार 7 दिनों तक सुना जाए तो जरूर ही व्यक्ति के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आएगा और जो इच्छा होगी वह पूरी होगी।

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