रंजन सोनी, अम्बिकापुर:- 2000 रुपए के 100 नकली नोट के साथ बांग्लादेश से आए आरोपी को सरगुजा पुलिस ने अंबिकापुर बस स्टैंड से गिरफ्तार किया है। अंबिकापुर क्राइम ब्रांच व कोतवाली पुलिस ने 25 अप्रैल को 2000 के 30 नकली नोट के साथ मध्यप्रदेश के ग्राम कोल्हागांव रीवा निवासी ज्ञानेंद्र तिवारी को भी गिरफ्तार किया था। ज्ञानेंद्र तिवारी को पुलिस रिमांड में लेकर पूछताछ करने पर पता चला कि वह अंतरराष्ट्रीय नकली नोटों के गिरोह से जुड़ा हुआ है। इसी तारतम्य में SP सदानंद कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से क्राइम ब्रांच एवं साइबर सेल की मदद से आज की गिरफ्तारी की है। पूर्व आरोपी ज्ञानेंद्र तिवारी द्वारा जब यह जानकारी मिली कि बांग्लादेश से बॉर्डर पार कर ये नोट भारत में खपाए जा रहे हैं तब पुलिस उसकी निशानदेही पर नकली नोट के गिरोह के प्रमुख सदस्यों में से एक को पकडऩे पश्चिम बंगाल के माल्दा गई हुई थी लेकिन वहां उसे सफलता नहीं मिली। क्योंकि आरोपी ने अपने आप को किसी काम में व्यस्त बताकर वह नहीं आया। उसने कहा कि वह भारत में कहीं भी आकर डिलीवरी देने को तैयार है, अभी किसी जरूरी काम में व्यस्त है। इस पर ज्ञानेंद्र तिवारी ने उसे कहां की अंबिकापुर छत्तीसगढ़ में एक ऐसी जगह है जहां के लोग नकली नोटों को नहीं पहचान पा रहे हैं वहां पर मार्केट बहुत अच्छा है आप भी अंबिकापुर आओ और वही हमें डिलीवरी दो।जब वह सोमवार की शाम अंबिकापुर पहुंचा तो पुलिस ने उसे बस स्टैंड से धरदबोचा।
SP सदानंद कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले का खुलासा किया
मामले का खुलासा करते हुए एसपी सदानंद कुमार ने बताया कि 25 अप्रैल को नगर के माया लॉज के पास से रीवा के ग्राम कोल्हागांव निवासी ज्ञानेंद्र तिवारी को 30 नकली नोटों के साथ व्यवसायी की शिकायत पर गिरफ्तार किया गया था। पुलिस रिमांड में लेने के बाद जब उससे पूछताछ की गई तो पहले तो उसने गुमराह किया, लेकिन कड़ाई से पूछताछ में उसने सच्चाई बताई। उसने बताया कि बांग्लादेश से काफी संख्या में 2000 के नोट भारत में खप रहे हैं।उसने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय नकली नोट गिरोह से उसके तार जुड़े हैं। उसे माल्दा वेस्ट बंगाल निवासी राजीकुलशेख उर्फ फिरोज नकली नोटकी डिलीवरी करता है। वह बांग्लादेश-भारत के कालियाचक थानांतर्गत मोहब्बतपुर बार्डर से लाता है। मालदा वेस्ट बंगाल पहुंची सरगुजा पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ज्ञानेंद्र की राजीकुलशेख से मोबाइल पर बात कराई तो उसने कहा कि वह शादी के सिलसिले में माल्दा से बाहर है। उसने कहा कि ज्ञानेंद्र दोस्त, आप जहां भी कहें वहां नोट की डिलीवरी दे दूंगा। इस पर ज्ञानेंद्र ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अंबिकापुर नाम का एक छोटा शहर है। यहां मैं 2000 के सारे नोट खपा चुका हूं। यहां के लोग 2 हजार के नकली नोट बिल्कुल नहीं पहचान पा रहे हैं,यहां का मार्केट काफी अच्छा है। मैं चाहता हूं कि तुम भी अंबिकापुर देख लो और अगली डिलीवरी वहीं दो। इस पर राजीकुलशेख तैयार हो गया।ज्ञानेंद्र से बातचीत के बाद नकली नोट लेकर राजीकुलशेख उर्फ फिरोज 30 अप्रैल की शाम करीब 5 बजे अंबिकापुर बस स्टैंड पहुंचा। यहां से उसने ज्ञानेंद्र को कॉल कर कहा कि वह अंबिकापुर के बस स्टैंड में खड़ा है। यह सूचना मिलते ही कोतवाली टीआई विनय सिंह बघेल व क्राइम ब्रांच की टीम ने घेराबंदी कर नकली नोटों के साथ तस्कर को धरदबोचा।
पुलिस ने उसके पास से 2000 रुपए के कुल 100 नोट 2 लाख रुपए बरामद कर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके खिलाफ धारा 489-बी, 489-सी के तहत कार्रवाई की है|
पिस्टल तस्करी एवं मर्डर के आरोपी भी है ये दोनों
पुलिस ने बताया कि आरोपी ज्ञानेंद्र तिवारी हत्या का आरोपी रह चुका है। वह बैंगलोर जेल में साढ़े 5 साल की सजा काट चुका है। फिलहाल वह जमानत पर था और नकली नोटों की तस्करी कर रहा था। ज्ञानेंद्र तिवारी की राजीकुलशेख से मुलाकात बैंगलोर जेल में ही हुई थी।राजीकुलशेख 17 पिस्टल के साथ गिरफ्तार हुआ था।वह भी 5 साल तक जेल में थाऔर फिलहाल जमानत पर है। दोनों मिलकर २००० रुपए के नकली नोट का कारोबार कर रहे थे।
इस कार्यवाही में कोतवाली पुलिस के अलावा क्राइम ब्रांच एवं साइबर सेल की जवानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।